कानपुर: 'बॉस' के टॉर्चर ने सेल्समैनों को बनाया कातिल; सिमकार्ड मैनेजर मोनू मर्डर केस का रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा - NINE ONE TIMES

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03/05/2026

कानपुर: 'बॉस' के टॉर्चर ने सेल्समैनों को बनाया कातिल; सिमकार्ड मैनेजर मोनू मर्डर केस का रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा

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टारगेट का दबाव, सरेआम गाली-गलौज और जलालत बनी हत्या की वजह; आंखों में स्प्रे झोंककर डंडों से बेरहमी से उतारा मौत के घाट, आरोपी बापन और अतीत गिरफ्तार

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तथ्य खुलासे के मुख्य बिंदु:

  • टारगेट का दबाव: बॉस मोनू अपना टारगेट पूरा करने के लिए सेल्समैनों पर दबाव बनाता था।
  • प्रताड़ना: सरेआम गाली-गलौज और मारपीट से दोनों आरोपी तंग आ चुके थे।
  • पैसों का विवाद: वीसी (BC) चलाने के पैसों के लिए भी मोनू लगातार दबाव बना रहा था।
  • साजिश: एक महीने पहले ही सुनसान अड्डा चुनकर हत्या का प्लान बनाया गया था।
  • गिरफ्तारी: लोकेशन और कॉल डिटेल के आधार पर बापन पाल और अतीत वर्मा अरेस्ट।

कानपुर। औद्योगिक नगरी कानपुर के चर्चित मोनू जायसवाल हत्याकांड की गुत्थी को सुलझाते हुए कैंट पुलिस ने एक ऐसे खौफनाक सच से पर्दा उठाया है, जिसने वर्कप्लेस कल्चर और बॉस-कर्मचारी के रिश्तों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सिमकार्ड सेल्स मैनेजर मोनू जायसवाल की हत्या किसी पेशेवर अपराधी ने नहीं, बल्कि उसके ही उन दो भरोसेमंद कर्मचारियों ने की थी, जो दिन-रात उसके साथ साये की तरह रहते थे। डीसीपी ईस्ट सत्यजीत गुप्ता ने शनिवार को इस जघन्य हत्याकांड का खुलासा करते हुए बताया कि मृतक मोनू द्वारा दिया जा रहा सेल्स टारगेट का दबाव और आए दिन होने वाली गाली-गलौज व प्रताड़ना ने आरोपियों के मन में नफरत का ऐसा बीज बोया, जिसका अंत एक जघन्य मर्डर के रूप में हुआ।

क्या था विवाद: सेल्स टारगेट और इंसेटिव का 'खूनी' गणित

​पुलिस की गिरफ्त में आए मुख्य आरोपी बापन पाल और उसके साथी अतीत वर्मा ने पूछताछ में जो बताया, वह चौंकाने वाला है। मोनू जायसवाल अलग-अलग मोबाइल कंपनियों के सिमकार्ड पोर्ट कराने का काम संभालता था। बापन और अतीत उसके अंडर में सेल्समैन के तौर पर काम करते थे। आरोपियों का आरोप है कि मोनू बहुत ही सख्त मिजाज का था। वह अपना खुद का व्यक्तिगत सेल्स टारगेट पूरा करने के लिए भी इन दोनों पर भारी दबाव बनाता था। मोनू अपनी गाड़ियों का इस्तेमाल करता था, लेकिन सारा काम इन दोनों से करवाता था ताकि महीने के अंत में उसे ज्यादा से ज्यादा 'इंसेंटिव' मिल सके। काम के दौरान छोटी सी भी गलती होने पर मोनू सरेआम गाली-गलौज करता था और कई बार मारपीट पर उतारू हो जाता था। बापन ने बताया कि मोनू मजबूत कद-काठी का था, इसलिए वे सीधे उसका मुकाबला नहीं कर पाते थे, लेकिन अंदर ही अंदर अपमान का बदला लेने की आग सुलग रही थी।

साजिश: एक महीने पहले चुना था 'डेथ पॉइंट'

​बेइज्जती और टॉर्चर जब बर्दाश्त के बाहर हो गया, तो करीब एक महीने पहले बापन और अतीत ने मोनू को रास्ते से हटाने का मन बना लिया। उन्होंने इसके लिए शुक्लागंज (उन्नाव) के पास एक सुनसान इलाके का चयन किया, जहां शाम के बाद परिंदा भी पर नहीं मारता था। 26 अप्रैल की शाम को साजिश के तहत आरोपियों ने मोनू को विश्वास में लिया और उसे शराब पार्टी का लालच देकर उसी सुनसान 'अड्डे' पर चलने के लिए तैयार कर लिया। मोनू को जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिन लोगों को वह कल तक गाली देता था, वे आज उसकी मौत का सामान तैयार कर बैठे हैं।

हत्या का तरीका: स्प्रे, डंडा और बेहिसाब गुस्सा

​आरोपियों ने बताया कि जैसे ही वे मझावन रोड के पास उस सुनसान जगह पर पहुंचे, उन्होंने मोनू को संभलने का मौका ही नहीं दिया। सबसे पहले बापन ने मोनू की आंखों में मिर्ची का स्प्रे झोंक दिया। अचानक हुए इस हमले से मोनू बदहवास हो गया और उसे दिखना बंद हो गया। इसके बाद अतीत और बापन ने पहले से छिपाकर रखे डंडों से मोनू पर हमला बोल दिया। उन्होंने मोनू के सिर और शरीर पर तब तक वार किए जब तक कि उसकी सांसें नहीं थम गईं। हत्या करने के बाद आरोपियों ने शव को सड़क किनारे फेंक दिया और वहां से फरार हो गए।

शातिर दिमाग: कातिल ही ढूंढता रहा लाश

​इस हत्याकांड का सबसे चौंकाने वाला पहलू बापन पाल का व्यवहार रहा। हत्या करने के अगले दिन जब मोनू का शव उन्नाव के मरहाला चौकी क्षेत्र में मिला, तो बापन बिल्कुल अनजान बनकर मोनू के परिवार के साथ खड़ा रहा। वह न केवल परिवार के साथ लाश ढूंढने का नाटक करता रहा, बल्कि गुमशुदगी दर्ज कराने के लिए परिजनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर थाने भी गया। उसकी इसी 'वफादारी' की वजह से शुरुआत में किसी को उस पर शक नहीं हुआ। हालांकि, परिजनों ने बताया कि मोनू आखिरी बार बापन के साथ ही देखा गया था।

पुलिस की तफ्तीश और गिरफ्तारी

​कैंट थाना प्रभारी ने जब मामले की फाइल खोली, तो सबसे पहले बापन पाल की कॉल डिटेल (CDR) और मोबाइल लोकेशन निकाली गई। पुलिस तब हैरान रह गई जब पाया कि जिस वक्त मोनू की हत्या हुई, उस वक्त बापन की लोकेशन भी ठीक वही थी। सीसीटीवी फुटेज में भी बापन मोनू के साथ दिखाई दिया। जब पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर सख्ती दिखाई, तो वह टूट गया और फफक-फफक कर रोते हुए अपना जुर्म कुबूल कर लिया। बापन की निशानदेही पर ही दूसरे आरोपी अतीत वर्मा को भी दबोच लिया गया।


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