एसडीएम और सीएमओ टीम की छापेमारी से मचा हड़कंप; ब्रह्मा नर्सिंग होम, वरदान और नोवा हॉस्पिटल समेत कई सेंटरों में मिलीं भारी कमियां, 2 दिन का अल्टीमेटम
तथ्य प्रशासनिक कार्रवाई की मुख्य बातें:
- बड़ा एक्शन: कानपुर देहात में सुरक्षा मानकों के विपरीत चल रहे 7 निजी अस्पतालों को नोटिस जारी।
- इन पर गिरी गाज: ब्रह्मा नर्सिंग होम, वरदान, नोवा, राजावत हॉस्पिटल और शार्दा आई केयर जांच के दायरे में।
- गंभीर कमियां: बेसमेंट का गलत इस्तेमाल, आपातकालीन निकास गायब और अग्निशमन के पुख्ता इंतजाम नहीं।
- अल्टीमेटम: नोटिस का 2 दिन के भीतर संतोषजनक जवाब न मिलने पर होगी सीलिंग की कार्रवाई।
- पृष्ठभूमि: लखनऊ अलीगंज कोचिंग सेंटर हादसे के बाद पूरे प्रदेश में चल रहा है व्यापक चेकिंग अभियान।
लखनऊ हादसे से लिया सबक: जिलाधिकारी के सख्त निर्देश
बता दें कि बीते दिनों लखनऊ के अलीगंज स्थित एक कोचिंग सेंटर में एसी (AC) में हुई शॉर्ट सर्किट के बाद भयंकर आग लग गई थी, जिसमें 15 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई थी और करीब 7 बच्चे गंभीर रूप से झुलस गए थे। इस भयावह घटना के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे प्रदेश में अवैध और मानक विहीन संस्थाओं के खिलाफ धड़पकड़ अभियान शुरू हुआ।
कानपुर देहात में भी जिलाधिकारी कपिल सिंह द्वारा जारी कड़े आदेशों के बाद गठित टीमों ने पहले दो दर्जन से ज्यादा कोचिंग सेंटरों पर छापेमारी की थी, जिसमें से एक दर्जन से अधिक सेंटरों को सील किया जा चुका है। अब इसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर स्वास्थ्य महानिदेशालय की गाइडलाइंस के तहत चिकित्सा केंद्रों को रडार पर लिया गया है।
एसीएमओ और नोडल अधिकारी की अगुवाई में भारी छापेमारी
कानपुर देहात में महानिदेशालय के कड़े रुख के बाद अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (ACMO) डॉ. एस. एल. वर्मा और नोडल अधिकारी (नृसिंग होम पंजीयन) की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय संयुक्त टीम का गठन किया गया। इस टीम ने जिले के विभिन्न कस्बों और मुख्य मार्गों पर संचालित हो रहे निजी चिकित्सा संस्थानों का औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान टीम ने मुख्य रूप से ब्रह्मा नर्सिंग होम, वरदान हॉस्पिटल, नोवा हॉस्पिटल, राजावत हॉस्पिटल और शार्दा आई केयर एंड पैथोलॉजी सेंटर सहित कई बड़े और नामचीन संस्थानों की गहनता से जांच की। जांच टीम जब इन अस्पतालों के भीतर पहुँची, तो वहाँ मरीजों की सुरक्षा को लेकर किए गए दावे पूरी तरह खोखले साबित हुए।
बेसमेंट का अवैध उपयोग और फायर एनओसी गायब
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच के दौरान मुख्य रूप से अस्पतालों में बेसमेंट के व्यावसायिक उपयोग, आपातकालीन निकास (Emergency Exit), अग्निशमन यंत्रों (Fire Extinguishers) की उपलब्धता, डॉक्टरों और स्टाफ के रजिस्ट्रेशन तथा अन्य आवश्यक सुरक्षा मानकों का बारीकी से परीक्षण किया।
जांच में यह चौंकाने वाली हकीकत सामने आई कि कई अस्पतालों ने बेसमेंट का अवैध उपयोग कर रखा था, जहाँ वेंटिलेशन की कोई व्यवस्था नहीं थी। सबसे गंभीर बात यह रही कि आपातकालीन स्थिति में मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए 'इमरजेंसी एग्जिट' तक गायब थे और आग बुझाने वाले उपकरण या तो एक्सपायर्ड थे या सिर्फ दिखावे के लिए टांगे गए थे। निर्धारित सुरक्षा मानकों का खुला उल्लंघन पाए जाने पर टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 7 संस्थानों के संचालकों को कारण बताओ नोटिस थमा दिया।
दो दिन के अंदर संतोषजनक जवाब न मिलने पर होगी सीलिंग
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एस. एल. वर्मा ने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि सभी नोटिस पाने वाले अस्पताल संचालकों को दो दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण विभाग के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। यदि दो दिन के अंदर किसी भी संस्थान से संतोषजनक जवाब या मानकों को पूरा करने का प्रमाण नहीं मिलता है, तो नियमानुसार अस्पताल का पंजीकरण निरस्त कर उसे तत्काल सील कर दिया जाएगा। जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अस्पतालों में आने वाले मासूम मरीजों और तीमारदारों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी रसूखदार को बख्शा नहीं जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग का यह औचक छापेमारी अभियान आगे भी समय-समय पर लगातार जारी रहेगा।





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