दंगों में धर्म नहीं मरता बल्कि धर्म को ढोने वाला गरीब मरता है। - NINE ONE TIMES

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01/03/2020

दंगों में धर्म नहीं मरता बल्कि धर्म को ढोने वाला गरीब मरता है।


हरा और भगवा दोनों ओर से  मुख्तलिफ़ रंगो को बचाने के लिए दोनों धर्मों के आम लोगों के जिस्मों से जो रंग बहता है उसका रंग लाल होता है।
              वह ना तो हरा होता है ना ही भगवा।


आज ये जो दंगे हो रहे हैं इस पर सवाल करने से अच्छा है इसका हल ढूंढा जाए ।
अगर इसका हल ढूंढेंगे तो उत्तर एक ही मिलेगा कि इन सारे धर्मों की मौत।
धर्मों की मौत करना कोई बहुत बड़ी बात नहीं है।
 
अगर एक अंधेरे कमरे से अंधकार को भगाना है तो हमे अंधकार पर मेहनत करने से अच्छा है कि उस कमरे में हम उजाले के लिए मेहनत करें । अगर हम उजाला कर देते हैं तो अंधकार अपने आप भाग जाएगा।


जब तक धर्मों का झूठा दंभ हमारे दिमाग में भरा रहेगा तब तक इंसानियत का बलात्कार होता रहेगा
                     


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