🇮🇳राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे  🇮🇳  पर क्यों चरखे की जगह अशोक चक्र - NINE ONE TIMES

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25/01/2020

  🇮🇳राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे  🇮🇳  पर क्यों चरखे की जगह अशोक चक्र

                                                                              🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
 _*क्या  आप जानते हैं  ⁉                                                                           राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे                                                  पर चरखे की जगह अशोक चक्र ने ली जो कि भारत के संविधान निर्माता डॉ बाबा साहब भीमराव अंबेडकर  जी  नें तिरंगे पर  लगवाया था जाने 24 तीलियां का महत्त्व और राष्ट्रीय तिरंगे में तीन रंगो के बारे में 22 जुलाई 1947 के दिन संविधान सभा ने तिरंगे को देश के झंडे के रूप में स्वीकार किया था जानिए भारत के झंडे के बारे में कुछ दिलचस्प बातें :-*_


_*रंगों के बारे में :-*_


_*केसरिया:-* त्याग और बलिदान का प्रतीक_


_*सफेद :-* सत्य, शांति और पवित्रता का प्रतीक_


_*हरा :-* समृद्धता का प्रतीक_


_*🔆अशोक चक्र :-जो न्याय का प्रतीक है 🔆*_


_*☸ अशोक चक्र के बारे में ☸ :-*_


_सम्राट अशोक के बहुत से शिलालेखों पर प्रायः एक चक्र बना हुआ है इसे अशोक चक्र कहते हैं यह चक्र धर्मचक्र का प्रतीक है उदाहरण के लिए सारनाथ स्थित सिंह-चतुर्मुख एवं अशोक स्तम्भ पर अशोक चक्र विद्यमान है भारत के राष्ट्रीय ध्वज में अशोक चक्र को स्थान दिया गया है_


_अशोक चक्र में चौबीस तीलियां हैं वे मनुष्य के अविद्या से दुरूख बारह तीलियां और दुरूख से निर्वाण बारह तीलियां की अवस्थाओं का प्रतिक है अशोक चक्र, सम्राट अशोक के समय से शिल्प कलाओं के माध्यम से अंकित किया गया था धर्म-चक्र का अर्थ भगवन बुद्ध ने अपने अनेक प्रवचनों में अविद्या से दूरूख तक बारह अवस्थाये और दूरूख से निर्वाण की बारह अवस्थाएं बताई है_


_*ये है राष्ट्रीय ध्वज पर अंकित अशोक चक्र मेँ 24 तीलियोँ का प्रत्येक भारतीय के जीवन मेँ महत्व:-*_


_*सम्राट अशोक ने प्रत्येक नागरिक को खुश रहने के लिये 2 मुख्य बिन्दु बताये :-*_ 


_1- न अधिक तेज_


_2-न अधिक धीमा_


_*सम्राट अशोक के द्वारा बताये गये जीवन के 4 प्रमुख कारण बताये जो तथागत बुद्ध से विचारों से लिए गए हैं:-*_


_3-दुनिया में दुःख है_


_4- दुःख का कारण है_


_5- कारण का निवारण है_


_6-निवारण के प्रति प्रयास करना_


_*सम्राट अशोक ने अपने राजतंत्र मेँ 8 महत्व पूर्ण बाते समाज के सामने रखी :-*_


_7- सबको शिक्षा_


_8- सबको सम्मान_


_9- सबको मानसिक स्वतंत्रता_


_10- सबको रोजगार_


_11- सबको न्याय_


_12- सबको चिकित्सा_


_13- सबको कर्त्वयोँ के प्रति जागरुक रहना_


_14- सभी को रास्ट्र के प्रति समर्पित_


_*सम्राट अशोक ने जीवन में अपनाने हेतु 10 महत्वपूर्ण नियम बताये:-*_


_15- सभी के प्रति दया भाव_


_16- सभी के प्रति करुणा मैत्री_


_17- सभी के प्रति शान्ति के लिये अग्रसर होना_


_18- सभी के प्रति उन्नति के लिये कार्य करना_


_19- सभी के प्रति क्षमा भाव होना_


_20- अपनी आय का कुछ अंश सामाजिक उन्नति मेँ व्यय करना_


_21- अपने पारिवारिक जीवन का निर्वाह करना_


_22- अपनी उन्नति से किसी की अवनति ना करना_


_23 - अपने द्वारा किसी को सामाजिक, मानसिक पीड़ा न पहुचाना_


_24 - अपने स्वास्थ के प्रति सचेत_
 _*24 तीलियाँ देश और समाज के चहुमुखी विकास के प्रति देशवासियों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में बतातीं हैं । जाने हमारे राष्ट्रीय ध्वजा के अशोक चक्र का हमारे लिए संदेश:-*_ 


_*जाने अशोक चक्र की 24 तीलियों का वास्तिक मतलब*_


 


_*1- पहली तीली - संयम (संयमित जीवन जीने की प्रेरणा देती है)*_
_*2- दूसरी तीली - आरोग्य (निरोगी जीवन जीने के लिए प्रेरित करती है)*_
_*3- तीसरी तीली - शांति (देश में शांति व्यवस्था कायम रखने की सलाह)*_
_*4- चौथी तीली - त्याग (देश एवं समाज के लिए त्याग की भावना का विकास)*_
_*5- पांचवीं तीली - शील (व्यक्तिगत स्वभाव में शीलता की शिक्षा)*_
_*6- छठवीं तीली - सेवा (देश एवं समाज की सेवा की शिक्षा)*_



_*7- सातवीं तीली - क्षमा (मनुष्य एवं प्राणियों के प्रति क्षमा की भावना)*_
_*8- आठवीं तीली - प्रेम (देश एवं समाज के प्रति प्रेम की भावना)*_
_*9- नौवीं तीली - मैत्री (समाज में मैत्री की भावना)*_
_*10- दसवीं तीली - बन्धुत्व (देश प्रेम एवं बंधुत्व को बढ़ावा देना)*_
_*11- ग्यारहवीं तीली - संगठन (राष्ट्र की एकता और अखंडता को मजबूत रखना)*_
_*12- बारहवीं तीली - कल्याण (देश व समाज के लिये कल्याणकारी कार्यों में भाग लेना)*_



_*13- तेरहवीं तीली - समृद्धि (देश एवं समाज की समृद्धि में योगदान देना)*_
_*14- चौदहवीं तीली - उद्योग (देश की औद्योगिक प्रगति में सहायता करना)*_
_*15- पंद्रहवीं तीली - सुरक्षा (देश की सुरक्षा के लिए सदैव तैयार रहना)*_
_*16- सौलहवीं तीली - नियम (निजी जिंदगी में नियम संयम से बर्ताव करना)*_
_*17- सत्रहवीं तीली - समता (समता मूलक समाज की स्थापना करना)*_
_*18- अठारहवी तीली - अर्थ (धन का सदुपयोग करना)*_



_*19- उन्नीसवीं तीली - नीति (देश की नीति के प्रति निष्ठा रखना)*_
_*20- बीसवीं तीली - न्याय (सभी के लिए न्याय की बात करना)*_
_*21- इक्कीसवीं तीली - सहकार्य (आपस में मिलजुल कार्य करना)*_
_*22- बाईसवीं तीली - कर्तव्य (अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना)*_
_*23- तेईसवी तीली - अधिकार (अधिकारों का दुरूपयोग न करना)*_
_*24 चौबीसवीं तीली - बुद्धिमत्ता (देश की समृधि के लिए स्वयं का बौद्धिक विकास करना)*_


 


 


_*उपरोक्त सभी 24 तीलियाँ सम्मिलित रूप से देश और समाज के चहुमुखी विकास की बात करती हैं एवं उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में स्पष्ट सन्देश देती हैं ।*_


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