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29/12/2020

कला एवं शिल्प महाविद्यालय की प्रतियोगिता में छात्राओं ने लिया प्रतिभाग

  • लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध कला एवं शिल्प महाविद्यालय ने दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया. जिसमें सोमवार को प्रथम दिन स्लोगन राइटिंग और फेस पेंटिंग प्रतियोगता का आयोजन किया गया.



लखनऊ: प्रदेश सरकार द्वारा शुरू किए गए अभियान मिशन शक्ति के तहत लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध कला एवं शिल्प महाविद्यालय ने दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया. जिसमें सोमवार को प्रथम दिन स्लोगन राइटिंग और फेस पेंटिंग प्रतियोगता का आयोजन किया गया. इस प्रतियोगिता में बीबीए प्रथम वर्ष से लेकर बीबीए फोर्थ ईयर की छात्राओं ने  किया



मिशन शक्ति के तहत दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया

कार्यक्रम समन्यक डॉ. अनीता कनौजिया ने कहा कि सरकार ने महिला सशक्तिकरण पर कार्यक्रम चलाया है. इसके अंतर्गत सभी डिपार्टमेंट अपने-अपने प्रोग्राम करा रहा है. इसी के तहत फाइन आर्ट डिपार्टमेंट ने भी सोमवार को मिशन शक्ति के तहत दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया है. जिसमें पहले दिन स्लोगन राइटिंग और फेस पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है. जिसमें भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, कन्या बाल विवाह, महिला सशक्तिकरण इस तरह के मुद्दे दिए गए थे. जो बच्चों ने फेस मास्क में पेंटिंग के जरिए दर्शाए हैं. इसका रिजल्ट कल मंगलवार को घोषित किया जाएगा

जल्दी शादी हो जाने की वजह से लड़कियां पूरी तरह समझदार नहीं हो पाती हैं 
इस कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाली श्रीयांशी सिंह बीबीए प्रथम वर्ष की छात्रा ने अपनी पेंटिंग की थीम के बारे में बताया कि लड़कियों के लिए जो शादी की उम्र निर्धारित की गई है 18 वर्ष वह बहुत कम है, क्योंकि लड़कियां उस उम्र में शादी नहीं करना चाहती हैं. वह इस उम्र तक आने में अपने और अपने परिवार के लिए पढ़ लिखकर कुछ करना चाहती हैं. जल्दी शादी हो जाने की वजह से लड़कियां पूरी तरह समझदार नहीं हो पाती हैं और वह आए दिन घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं. श्रीयांशी का मानना है कि भारत सरकार को इस कानून को बदल देना चाहिए, ताकि वह आगे चलकर उम्र के हिसाब से समझदार हो सकें और सारी चीजों को सही तरीके से समझकर फैसला ले सकें. छात्र विनय सिंह ने बताया कि उनकी पेंटिंग की थीम नारी शक्ति पर है. विनय ने बताया कि लोगों को मानना है कि लड़कियां कुछ नहीं कर सकती हैं. इसलिए उनको किसी भी काम को करने से रोक दिया जाता है. इसलिए उन्होंने पेंटिंग के जरिये दर्शाया है कि महिला आदि शक्ति का रूप है और उनको भी मौका देना चाहिए.


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