तथ्य मुख्य बिंदु:
- बचत की अपील: पेट्रोल-डीजल और सोने का इस्तेमाल कम करने का आह्वान।
- आर्थिक सुरक्षा: आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा बचाने पर जोर।
- परमाणु गौरव: पोकरण परीक्षण की वर्षगांठ पर वैज्ञानिकों के सामर्थ्य को सराहा।
- सांस्कृतिक विरासत: सोमनाथ मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने पर डाक टिकट जारी।
- आधुनिक भारत: वडोदरा में सरदारधाम-3 का उद्घाटन और शिक्षा पर चर्चा।
संसाधनों की बचत: 'जरूरत न हो तो सोना न खरीदें'
प्रधानमंत्री ने लगातार दूसरे दिन ईंधन और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "जहां संभव हो पेट्रोल-डीजल का उपयोग कम करें और मेट्रो, इलेक्ट्रिक बस व पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता दें।" सोने के आयात पर देश के खर्च का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि सोने की खरीद पर देश का बहुत बड़ा पैसा विदेश जाता है। जब तक हालात सामान्य न हों, हमें सोने की खरीद टालनी चाहिए क्योंकि वर्तमान में इसकी अनिवार्य जरूरत नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि खाने के तेल के आयात पर भी देश की विदेशी मुद्रा खर्च होती है। अगर लोग तेल का कम उपयोग करें तो सेहत और शहर दोनों को फायदा होगा। पीएम ने सुझाव दिया कि जहाँ संभव हो स्कूल ऑनलाइन मोड में चलें और कंपनियाँ वर्क फ्रॉम होम दें, ताकि सड़कों पर गाड़ियों का दबाव कम हो और ईंधन की बचत हो सके।
सोमनाथ में स्वाभिमान की हुंकार: परमाणु शक्ति का गौरव
इससे पहले, सोमनाथ मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के 75 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित 'अमृत महोत्सव' में पीएम ने शिरकत की। 11 मई की ऐतिहासिक तारीख को याद करते हुए पीएम ने कहा कि आज ही के दिन 1998 में भारत ने पोकरण में परमाणु परीक्षण कर दुनिया को हिला दिया था।
पीएम ने भावुक होते हुए कहा, "तब दुनिया भर की शक्तियां भारत को दबोचने मैदान में उतर गई थीं और हमारे लिए सारे रास्ते बंद कर दिए गए थे। लेकिन हम डरे नहीं, डटे रहे। हमने इसे 'ऑपरेशन शक्ति' नाम दिया क्योंकि शिव के साथ शक्ति की आराधना ही हमारी परंपरा है।" उन्होंने सोमनाथ मंदिर के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि लुटेरों ने बार-बार इस मंदिर को तोड़ा, लेकिन हर बार यह अपनी राख से उठ खड़ा हुआ। सोमनाथ हमें याद दिलाता है कि कोई भी राष्ट्र तब तक मजबूत नहीं हो सकता, जब तक वह अपनी जड़ों से न जुड़ा रहे।





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